संपादकीय नीति — लेख कैसे लिखे और जांचे जाते हैं
आख़िरी अपडेट: 7 अक्टूबर 2026
हम दो तरह की सामग्री दिखाते हैं
- दूसरे प्रकाशकों की खबरें: भरोसेमंद समाचार संस्थानों की सार्वजनिक फ़ीड से शीर्षक, छोटा सार, चित्र और स्रोत। हर खबर पर प्रकाशक का नाम लिखा होता है और पूरी खबर उसी की वेबसाइट पर है। हम इन खबरों को बदलते या दोबारा नहीं लिखते।
- हमारे अपने लेख ("हमारे लेख"): हिंदी रफ़्तार डेस्क के लिखे व्याख्यात्मक लेख, जैसे सोने का भाव कैसे तय होता है या ऑनलाइन ठगी से कैसे बचें। इन पर "हिंदी रफ़्तार डेस्क" लिखा होता है।
हमारे लेख कैसे लिखे जाते हैं
- हर तथ्य आधिकारिक या प्राथमिक स्रोत से लिया जाता है — जैसे सरकारी विभाग, नियामक संस्था, कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या खेल संस्था के नियम। ये स्रोत लेख के अंत में "स्रोत" में लिंक के साथ दिए जाते हैं।
- जो जानकारी समय के साथ बदलती है (दाम, टैक्स, हेल्पलाइन नंबर, नियम), उसे कम से कम हर तीन महीने में दोबारा जांचा जाता है। जांच की तारीख लेख पर "आख़िरी बार जांचा गया" के रूप में लिखी रहती है।
- उदाहरणों में दिए गए आंकड़े साफ़ तौर पर "उदाहरण" या "काल्पनिक" बताए जाते हैं, ताकि उन्हें आज का भाव न समझा जाए।
- सेहत, पैसे या कानून से जुड़े लेख सामान्य जानकारी के लिए हैं, विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं।
सुधार नीति
हमारे किसी लेख में गलती मिलने पर, उसकी पुष्टि होते ही (आम तौर पर 7 दिनों के भीतर) लेख सुधारा जाता है, "अपडेट" की तारीख बदली जाती है और ज़रूरी सुधार लेख में नोट के रूप में लिखा जाता है। गलती की सूचना संपर्क पेज पर दिए ईमेल पर भेजें — लेख का लिंक और सही जानकारी का स्रोत ज़रूर लिखें।
निष्पक्षता और विज्ञापन
- किसी राजनीतिक दल, कंपनी या व्यक्ति से पैसे लेकर कोई लेख या खबर नहीं दिखाई जाती।
- अगर भविष्य में विज्ञापन या प्रायोजित सामग्री आए, तो वह साफ़ तौर पर "विज्ञापन" या "प्रायोजित" लिखकर दिखाई जाएगी।
- खबरें किसी विचारधारा के हिसाब से चुनी नहीं जातीं; सेक्शन में वही दिखता है जो प्रकाशकों की फ़ीड में सबसे नया है।
सवाल या सुधार की सूचना के लिए संपर्क करें पेज देखें।