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ऑनलाइन ठगी से कैसे बचें: 10 आम तरीके और ठगी होने पर क्या करें
यह लेख दूसरी भाषा में: Englishગુજરાતી
सीधा जवाब: ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए ओटीपी, यूपीआई पिन या पासवर्ड किसी को न बताएं, अनजान लिंक और .apk फ़ाइल न खोलें, और "आज ही करो" जैसी जल्दबाज़ी वाली बातों पर रुककर सोचें। पैसा पाने के लिए कभी पिन नहीं डालना पड़ता, और "डिजिटल अरेस्ट" नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ठगी हो जाए तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
ऑनलाइन ठगी के 10 आम तरीके कौन-से हैं?
1. केवाईसी अपडेट या खाता बंद होने का मैसेज
"आपका बैंक खाता या सिम आज बंद हो जाएगा, केवाईसी अपडेट करें" — साथ में एक लिंक। लिंक खोलते ही नकली वेबसाइट आपकी बैंक जानकारी या ओटीपी मांगती है। बैंक कभी ऐसे लिंक से केवाईसी नहीं कराते।
2. बिजली बिल कटने की धमकी
"आज रात आपकी बिजली कट जाएगी, इस नंबर पर बात करें।" कॉल करने पर कोई ऐप डाउनलोड करवाया जाता है, जिससे फ़ोन का कंट्रोल ठग के पास चला जाता है।
3. पार्सल में ड्रग्स और "डिजिटल अरेस्ट"
किसी कूरियर कंपनी या पुलिस के नाम से कॉल आती है कि आपके नाम के पार्सल में गैरकानूनी सामान मिला है। फिर वीडियो कॉल पर नकली अफ़सर "डिजिटल अरेस्ट" का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफ़र करवाते हैं। याद रखें: कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तारी नहीं करती और न ही पैसे मांगती है।
4. पार्ट-टाइम जॉब और "टास्क" वाली ठगी
वीडियो लाइक करने या रिव्यू लिखने के बदले कमाई का लालच। शुरुआत में कुछ सौ रुपये मिलते भी हैं, फिर "बड़ा टास्क" के नाम पर पैसे जमा करवाए जाते हैं जो कभी वापस नहीं आते।
5. शेयर ट्रेडिंग और निवेश ग्रुप
व्हाट्सऐप या टेलीग्राम ग्रुप में भारी मुनाफ़े के स्क्रीनशॉट दिखाकर नकली ऐप में निवेश करवाया जाता है। ऐप में मुनाफ़ा दिखता है, पर पैसा निकल नहीं पाता।
6. नकली कस्टमर केयर नंबर
इंटरनेट पर सर्च करके मिला "हेल्पलाइन" नंबर ठग का भी हो सकता है। कस्टमर केयर नंबर हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही लें।
7. पैसे पाने के लिए QR कोड
कोई कहे कि पैसे भेजने के लिए QR कोड स्कैन करके पिन डालिए — यह ठगी है। पैसा पाने के लिए कभी यूपीआई पिन नहीं डालना पड़ता। पिन सिर्फ़ पैसा भेजते समय लगता है।
8. शादी का कार्ड या फ़ाइल के नाम पर APK
व्हाट्सऐप पर ".apk" फ़ाइल आती है, जिसे "शादी का कार्ड" या "बिल" बताया जाता है। इसे इंस्टॉल करते ही फ़ोन के मैसेज और ओटीपी ठग तक पहुंचने लगते हैं। ऐप सिर्फ़ प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से ही इंस्टॉल करें।
9. लॉटरी, इनाम और KBC के नाम पर कॉल
"आपकी लॉटरी लगी है, टैक्स या फ़ीस जमा कीजिए।" जो लॉटरी आपने खरीदी ही नहीं, वह लग नहीं सकती।
10. वीडियो कॉल से ब्लैकमेल
अनजान नंबर से वीडियो कॉल उठाते ही अश्लील रिकॉर्डिंग बनाकर ब्लैकमेल किया जाता है। अनजान वीडियो कॉल न उठाएं, और ऐसा हो जाए तो डरें नहीं, तुरंत शिकायत करें।
ठगी से बचने के 6 नियम क्या हैं?
- ओटीपी, यूपीआई पिन, कार्ड का सीवीवी या पासवर्ड किसी को भी न बताएं — बैंक का कर्मचारी भी नहीं मांगता।
- "आज ही", "अभी नहीं किया तो" जैसी जल्दबाज़ी वाली बातों पर रुकें और सोचें।
- अनजान लिंक और फ़ाइल न खोलें।
- स्क्रीन शेयर करने वाले ऐप (रिमोट एक्सेस) किसी के कहने पर इंस्टॉल न करें।
- बैंक और कंपनियों के नंबर सिर्फ़ आधिकारिक वेबसाइट से लें।
- परिवार के बुज़ुर्गों और बच्चों को भी ये बातें बताएं।
ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
- 1930 पर कॉल करें: यह भारत सरकार की राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन है। ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रुकवाने की संभावना उतनी ज़्यादा होगी।
- cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें: गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
- बैंक को तुरंत बताएं: कार्ड और नेट बैंकिंग ब्लॉक करवाएं।
- सबूत संभालकर रखें: मैसेज, कॉल का नंबर, ट्रांज़ैक्शन आईडी और स्क्रीनशॉट।
- संदिग्ध कॉल-मैसेज की रिपोर्ट: दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल पर "चक्षु" सुविधा से ठगी वाले कॉल और मैसेज की रिपोर्ट कर सकते हैं। यहीं अपने नाम पर चल रहे मोबाइल कनेक्शन भी जांच सकते हैं।
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स्रोत
इस लेख के तथ्य इन आधिकारिक स्रोतों से जांचे गए हैं:
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
साइबर ठगी की शिकायत किस नंबर पर करें?
राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 है। ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर दर्ज की जा सकती है।
क्या डिजिटल अरेस्ट सच में होता है?
नहीं। कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है। कोई पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं करती और न पैसे मांगती है। ऐसा कॉल आए तो काट दें और 1930 पर बताएं।
पैसे पाने के लिए यूपीआई पिन डालना पड़ता है क्या?
नहीं। यूपीआई पिन सिर्फ़ पैसा भेजते समय डाला जाता है। पैसा पाने के लिए पिन या QR कोड स्कैन करने को कहा जाए तो वह ठगी है।
ठगी के बाद पैसा वापस मिल सकता है?
अगर तुरंत 1930 पर शिकायत हो जाए तो कई बार ठग के खाते में पैसा रोका जा सकता है। इसलिए देर न करें और सारे सबूत संभालकर रखें।