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पेट्रोल-डीज़ल

पेट्रोल-डीज़ल के दाम रोज़ कैसे तय होते हैं और हर शहर में अलग क्यों होते हैं

यह लेख दूसरी भाषा में: Englishગુજરાતી

सीधा जवाब: पेट्रोल-डीज़ल का दाम तेल कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम) की बेस कीमत, ढुलाई, केंद्र के उत्पाद शुल्क, डीलर कमीशन और राज्य के वैट को जोड़कर बनता है। 16 जून 2017 से दाम रोज़ सुबह 6 बजे बदल सकते हैं। राज्यों का वैट अलग होने से हर राज्य में कीमत अलग होती है। अपने पंप का रेट उसके डीलर कोड से SMS भेजकर जाना जा सकता है।

पेट्रोल-डीज़ल के दाम रोज़ क्यों बदल सकते हैं?

16 जून 2017 से देश में पेट्रोल और डीज़ल के दाम रोज़ तय होते हैं। सरकारी तेल कंपनियां — इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) — कोई बदलाव हो तो उसे सुबह 6 बजे लागू करती हैं। पहले यह बदलाव हर पखवाड़े होता था।

रोज़ाना व्यवस्था का मतलब यह नहीं कि हर दिन दाम बदलेंगे ही। व्यवहार में कई बार दाम हफ़्तों या महीनों तक नहीं बदलते; व्यवस्था बस ऐसी है कि बदलाव किसी भी सुबह लागू हो सकता है।

एक लीटर की कीमत में क्या-क्या जुड़ता है?

पंप पर दिखने वाली कीमत कई हिस्सों से मिलकर बनती है:

बेस प्राइस उत्पाद शुल्क राज्य का वैट ढुलाई डीलर कमीशन = पंप पर एक लीटर की कीमत (हिस्सों का आकार सांकेतिक है, असली अनुपात नहीं)
पंप की कीमत पांच हिस्सों से बनती है; राज्य का वैट अलग होने से हर राज्य में दाम अलग होता है।
  1. बेस प्राइस: कच्चे तेल की लागत, रिफ़ाइनिंग और तेल कंपनी का खर्च। यह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के भाव और रुपये-डॉलर की दर पर निर्भर करता है।
  2. ढुलाई (फ़्रेट): रिफ़ाइनरी या डिपो से पेट्रोल पंप तक ईंधन पहुंचाने का खर्च।
  3. केंद्र का उत्पाद शुल्क (एक्साइज़ ड्यूटी): यह पूरे देश में एक जैसा होता है।
  4. डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप मालिक का हिस्सा।
  5. राज्य का वैट या बिक्री कर: हर राज्य अपनी दर तय करता है, कुछ राज्य अलग से सेस भी लगाते हैं।

पेट्रोल और डीज़ल अभी जीएसटी के दायरे से बाहर हैं, इसलिए इन पर राज्य और केंद्र अपने-अपने टैक्स लगाते हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की संस्था PPAC अपनी वेबसाइट पर कीमतों का ब्यौरा प्रकाशित करती है।

हर राज्य और शहर में दाम अलग क्यों होते हैं?

सबसे बड़ा कारण है राज्यों का वैट। जिस राज्य में वैट ज़्यादा है, वहां पेट्रोल महंगा मिलेगा। इसी वजह से कई बार सीमा पर बसे लोग पड़ोसी राज्य से तेल भरवाना सस्ता पाते हैं। एक ही राज्य के अलग-अलग शहरों में भी डिपो से दूरी के हिसाब से ढुलाई का खर्च बदलता है, इसलिए कुछ पैसों का फ़र्क दिखता है।

अपने पेट्रोल पंप का आज का रेट कैसे जानें?

हर पेट्रोल पंप का एक डीलर कोड होता है, जो पंप पर लिखा रहता है। इस कोड से SMS भेजकर उस पंप का आज का रेट जाना जा सकता है:

कंपनी SMS का फ़ॉर्मेट नंबर
इंडियन ऑयल RSP (डीलर कोड) 9224992249
भारत पेट्रोलियम RSP (डीलर कोड) 9223112222
हिंदुस्तान पेट्रोलियम HPPRICE (डीलर कोड) 9222201122

कंपनियां ये नंबर बदल भी सकती हैं, इसलिए ताज़ा नंबर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर ज़रूर देखें। वहां शहर के हिसाब से रेट भी मिलते हैं।

पेट्रोल पंप पर किन बातों का ध्यान रखें?

  • मीटर ज़ीरो से शुरू हो: भराई शुरू होने से पहले मशीन पर 0 देख लें।
  • 5 लीटर की जांच: पंप के पास नाप-तौल विभाग से प्रमाणित 5 लीटर का माप होता है। मात्रा पर शक हो तो जांच करवाने का अधिकार है।
  • फ़िल्टर पेपर टेस्ट: पेट्रोल में मिलावट का शक हो तो फ़िल्टर पेपर टेस्ट मांग सकते हैं। शुद्ध पेट्रोल बिना दाग छोड़े उड़ जाता है।
  • बिल लें और शिकायत हो तो कंपनी के कस्टमर केयर पर दर्ज करें।

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स्रोत

इस लेख के तथ्य इन आधिकारिक स्रोतों से जांचे गए हैं:

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पेट्रोल-डीज़ल के नए दाम कब लागू होते हैं?

तेल कंपनियां कोई बदलाव हो तो उसे सुबह 6 बजे लागू करती हैं। अगर उस दिन कोई बदलाव नहीं हुआ, तो पिछले दिन वाला रेट ही चलता रहता है।

पेट्रोल पर जीएसटी क्यों नहीं लगता?

पेट्रोल, डीज़ल और कुछ दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद अभी जीएसटी के बाहर रखे गए हैं। इन पर केंद्र उत्पाद शुल्क और राज्य वैट लगाते हैं।

दो पास के शहरों में पेट्रोल का दाम अलग क्यों है?

अगर शहर अलग राज्यों में हैं तो वैट की दर अलग होती है। एक ही राज्य में हों तो डिपो से दूरी के हिसाब से ढुलाई का खर्च बदलता है।

डीलर कोड कहां मिलेगा?

डीलर कोड पेट्रोल पंप के बोर्ड या मशीन के पास लिखा होता है। पंप के कर्मचारी से भी पूछ सकते हैं।